Newborn Baby Care Tips in Hindi - नवजात की देखभाल

Newborn Baby Care Tips in Hindi - नवजात की देखभाल 

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Newborn Baby Care Tips in Hindi - नवजात की देखभाल




जीवन की सबसे बड़ी कला है किसी नवजात की देखभाल । नन्हा शिशु बहुत कोमल होता है। जरा-सी लापरवाही उसके लिए नुकसानदेह हो सकती है। इसलिए बच्चे की देखभाल रूई के | फाहों की तरह की जाती है। अगर एक मां इसमें निपुण होती है तभी उसका मां बनना सफल कहलाता है ।
बच्चों को सुरक्षित और स्वस्थ रखने के  लिए छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देकर उन्हें हर मुसीबत से बचाया जा सकता है। खासकर उनकी मालिश और नहलाने को लेकर खासी सावधानी बरतनी
चाहिए। साथ ही नन्हे शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी कम होती है, उसकी सही देखभाल और लालन पालन में सावधानी उसे मजबूत बनाती है।

कैसे उठाएं नवजात को गोद में (Know how to handle your newborn)

  •  नवजात का शरीर काफी नाजुक कोमल होता है। छोटे बच्चों को प्यार से दोनों हाथों के बल उठायें। सिर झुकने से बचायें। अकसर नवजात बच्चों का सिर काफी नाजुक होता है।
  • बच्चे को उठाते समय उसके सिर और गर्दन को ठीक से पकड़े रहें, जैसे उनको सपोर्ट दे रहे हों। एक हाथ सिर और गर्दन के नीचे और एक हाथ पैर के नीचे रखें और फिर पालने के झूले की तरह बच्चे को सपोर्ट दें।
  • छोटे बच्चों के उंगलियों पर बालों को नहीं उलझने दें। नवजात के उगलियों, गले आदि शरीर अंग पर मां के बाल फसंने पर आराम से निकालें। नवजात बच्चे के अंगों पर लगा बाल उगंलियां, शरीर अंग काट सकता है। क्योंकि नवजात का शरीर बहुत ही नाजुक कोमल होता है।
  • नवजात को गंदें हाथों से नहीं पकड़ने – छुएं। अकसर नवजात की रोगप्रतिरोधक क्षमत नाजुक होती है। नवजात को पकड़ने से पहले हाथों को एंटीसेप्टिक क्रीम, साबुन से हाथ धायें और हाथ  सुखा कर ही बच्चे को उठाये गोद लें। जिससे नवजात को वायरल संक्रमण की सम्भावनाएं नहीं रहती हैं।
  • नवजात को कभी भी जोर से झकझोरें या हिलाए नहीं, चाहे आप उससे खेल में ठिठोली कर रहे हों या गुस्से में ही क्यों न हो। इससे बच्चे के सिर में खून रिसने लगेगा और मौत भी हो सकती है। कभी भी नवजात को सोते समय झकझोड़ कर नहीं उठाए। इससे बेहतर है कि उसके पैर में हल्की चिकोटी काटे या सहलाएं या फिर गालों को सहलाएं। याद रहें नवजात को हमेशा नर्म और मखमली स्पर्श ही करें।
  • नवजात को नर्म और गर्म कपड़े में लपेट कर रखने के लिए सीखें। इससे बच्चा काफी सुरक्षित महसूस करता है। 0-2 महीने तक शिशु को जरुर लपेटकर रखें। इससे बच्चे को वातावरण के बदलाव का ज्यादा असर नहीं पड़ता है।

मालिश बनाएगी मजबूत Massage Makes Baby Strong

बच्चा चूंकि मां की गर्भ में बंधा हुआ सा होता है अतः उसकी जोड़ों को खोलने के लिए और हड्डियों की मजबूती के लिए मालिश सबसे अहम है। अक्सर लोग मालिश के लिए दाई पर
निर्भर रहते हैं पर कोशिश यही करें कि बच्चे के मालिश कोई रिश्तेदार जैसे दादी, नानी, बुआ या फिर मां ही करे। मां के हाथों का प्यार भरा स्पर्श बच्चे को सुरक्षा का अहसास दिलाता है। रोजाना बच्चे को नहलाने से पहले उसकी मालिश जरूर करनी चाहिए। मालिश से न केवल बच्चे के शरीर को आवश्यक पोषण मिलता है बल्कि उसके शरीर की कसरत भी होती है।

कैसे करें मालिश How To Massage You Baby

बच्चे की मालिश के लिए बेबी ऑयल, सरसों या जैतून के तेल का चुनाव करें। मालिश करने का सबसे सही तरीका यह है कि आप जिस कमरे में बच्चे की मालिश करने जा रही हैं, उसकी खिड़किया और दरवाजे अच्छी तरह बंद कर दें ताकि बाहर की हवा बच्चे को प्रभावित न करे। फिर आप अपने पैर फैलाकर बच्चे को अपने दोनों पैरों के बीच लिटाएं और अपने हाथों में तेल लगा कर बच्चे की मालिश शुरू करें। मालिश की शुरुआत हमेशा बच्चे के पैरों से करें। फिर हल्के हाथों से उसके पेट और छाती की मालिश करें। उसके बाद बच्चे को पेट के बल उलटा लिटाकर उसकी पीठ और कमर की मालिश करें और सबसे अंत में बच्चे के सिर की मालिश करें।
शिशु की नियमित स्वास्थ्य जांच / Newborn, Child Health Check Up
नवजात स्वास्थ्य की जांच महीना अन्तराल में 1-2 अवश्य करवायें। शिशु स्वास्थ्य, मस्तिष्क और शरीरिक विकास – ग्रोथ जानना जरूरी है। जिससे नवजात की समय के साथ-साथ सही ग्रोथ हो सके। नवजात की असमान्य हरकत को नकारे नहीं। जैसे कि बच्चे के आंखों से लगातार आंसू आना, अधिक पसीना आना, नजर परिवर्तन, चीखना चिल्लाना, लगातार रोना, शरीर गर्म रहना आदि लक्षण है।

Newborn Baby Care Tips in Hindi - नवजात की देखभाल 

Newborn Baby Care Tips in Hindi - नवजात की देखभाल

नवजात को पकड़ने और संभालने का तरीका (Know how to hold newborn)

नवजात को गोद में लेने से पहले यह सुनिश्चित कर लें कि आपके हाथ के नीचे बच्चे का सिर और गर्दन सही तरीके से है कि नहीं। जब-जब बच्चे को गोद में लेने के लिए उठाएं तो सिर और गर्दन को जितना सपोर्ट मिलेगा उतना अच्छा रहेगा। गोद में बच्चे के सिर को अपने कोहनी के नीचे आराम करने दे औप पूरे शरीर को अपने बांह पर। जब तक बच्चा गोद में रहे उसके मूवमेंट पर पूरा ध्यान बनाकर रखें।

नवजात के लिए स्तनपान  / Breastfeeding Newborn



नवजात के लिए Breastfeeding बहुत जरूरी है। मां का दूध बच्चे के लिए रिच पोषण स्रोत है। प्रसव के बाद का कोलस्ट्रम – मेच्योर मिल्क नवजात के लिए खास पोषण है। जोकि नवजात को रिच पौषण दिलाने के साथ-साथ रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। जोकि नवजात को वायरल संक्रमण जुकाम से बचाती है। नवजात को समय अन्तराल पर स्तनपान करवाते रहें। नवजात को केवल मां का दूध पिलायें। कई मां आधुनिक लाईफ स्टाईल के कारण नवजात को ब्रेस्ट फीडिंग नहीं करवाती हैं। शिशुओं के लिए मां का दूध बरदान है।
  • स्तनपान कराने के बाद रोजाना नहाते समय साफ पानी से स्तनों को धोएं। दूध पिलाने के बाद स्तनों को साफ कपड़े से पोछें या दोबारा कपड़े से ढ़कने से पहले उन्हें स्वाभाविक रुप से सूखने दें।
  • नवजात को दिन में 5-6 बाद स्तनपान करवायें। अधिक स्तनपान से नवजात को दस्त, उल्टी, अपचन की समस्या हो सकती है। अगर नवजात दिन में 5-6 बार डायपर गीला करे तो चिकित्सक को दिखायें।
  • अगर आप शिशु को स्तनपान करा रहीं हैं तो ध्यान रहे इसके स्थान पर चीनी घुला पानी, शहद घुला पानी या अन्य कुछ उल्टी-सीधी चीजें कभी न दें।  
  • स्तनों पर अधिक दूध होने पर दूध कपड़े पर निकालें। नवजात को अधिक स्तनपान नहीं करवायें।
  • अगर आपका शिशु काफी देर तक स्तनपान कर रहा है तो वो पूरे दिन में 6 से 8 बार डायपर गीला कर सकता है। पेट भी गड़बड़ हो सकती है। मगर इससे घबराए नहीं। अगर चार बार से ज्यादा डायपर को गीला करता है तो डॉक्टर के पास जाएं।
  • नवजात को स्तनपान करवाते समय नवजात का सिर ऊपर की तरफ उठाकर रखें। नवजात का सिर झुकने से बचाये। और नवजात को सीधे लिटाकर स्तनपान नहीं करवायें।
नवजात को बोतल फीडिंग कैसे करवायें / Newborn Bottle Feeding

अकसर कई बार मां स्तनों में दूध की कमी वजह से नवजात को बोतल फीडिंग करवानी पड़ती है। डिब्बा दूध, पाउडर नवजात सीमित मात्रा में करवायें। डिब्बे पर लिखे निर्देश ध्यान से पढ़े। लिखित रूप में बताये गये निर्देशों अनुसार नवजात को बोतल फीडिंग करवायें।





  • भूल कर भी बोतल में बचे दूध को फ्रीज में न रखें और उसी दूध को दोबारा न पिलाएं, हर बार ताजा बना हुआ दूध ही बच्चे को पिलाएं।
  • नवजात का सिर शरीर ऊपर कर बोतल फीडिंग करवायें। नवजात को लिटाकर, नवजात का सिर पीछे की तरफ झुकी स्थिति पर बोतल फीडिंग नहीं करवायें। बोतल 40 डिग्री कोण तक झुकाकर पिलाएं।
  • हर तीन घंटे पर शिशु को बोतल फीडिंग कराएं या जब भूख लगे तब।
  • दूध फीडिंग बोतल स्टील, कांच से बनी हुई इस्तेमाल करें। प्लास्टिक फीडिंग बोतल बच्चों के स्वास्थ्य के हानिकारक होती है। प्लास्टिक बोतल में गर्म डालने पर कैमिक्ल दूध में घुलने लगता है। अकसर प्लास्टिक गर्मी की चपेट में आने पर कैमिक्ल छोड़ने लगता है। उत्तम क्वालिटी के बने प्लास्टिक मिल्क फीडिंग बोतल इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • बोतल में बचा हुआ वासी दूध नवजात को दोबारा नहीं पिलाएं।


  • Newborn Baby Care Tips in Hindi - नवजात की देखभाल 

    Newborn Baby Care Tips in Hindi - नवजात की देखभाल


    जाने शिशु को डायपर पहनाने के तरीके (Know how to Diaper your Newborn)

    नवजात का डायपर गीला होने पर तुरन्त बदलें। गीले डायपर से शिशु कोमल त्वचा रैशेज संक्रमित हो सकती है। Baby Diapers 3 घण्टे के अंतराल में बदलते रहें। अगर कोमल कपड़ा इस्तेमाल कर रहें तो उसे एंटी सेप्टिक लिक्वड से धोएं फिर अच्छे से सुखाकर इस्तेमाल करें। गीला डायपर कपड़ा शिशु त्वचा को रैशेज संक्रमण करता है। डायपर बदलने से आॅलिव आॅयल, बेबी आॅयल से नवजात के शरीर पर मालिश करें। यूज किया डायपर दोबारा इस्तेमाल नहीं करें।


    नवजात को कैसे नहलाएं / Newborn Bathing Tips
    नवजात शिशु को नहलाते समय पानी आंखों, नाक, कानों, मुंह में जाने से बचाएं। सावधानिपूर्वक नवजात को नहलाएं।
    नाल-नाभि सूखने के बाद नवजात को सप्ताह 2-3 बार नहलाएं। नवजात के शरीर को नाॅमल गुनगुने पानी में कोमल कपड़ा भिगो कर साफ करें। अधिक गर्म पानी नवजात की साफ सफाई नहीं करें। नवजात का शरीर बहुत कोमल और नाजुक होता है।
    • नवजात को लिटाकर या छिरछा झुकाकर नहीं नहलायें। दो व्यक्ति मिलकर सावधानिपूर्वक नहलाएं। नवजात को बुजुर्ग या अनुभवी व्यक्ति की देखरेख में नहलाएं।
    • शिशु को नहलाने के तुरन्त बाद बेबी क्रीम, बेबी आॅयल मालिस करें। और नवजात को बाहरी हवा में ले जाने से बचे।
    • नवजात को नहलाने के बाद सुला दें।
    • नवजात को चिकित्सक द्वारा सुझाये गये सुरक्षित बेबी शेम्पू, सोप, क्रीम, आॅयल ही इस्तेमाल करें। तीखा तेल एंव झाग युक्त साबुत शैम्पू शिशु की त्वचा के लिए नुकसान पहुंचाता है।
    • नवजात शरीर पर सुऱिक्षत बेवी आॅयल से नियमित मसाज करें। मसाज से बच्चों का शरीर मजबूत और स्वस्थ रहता है।
    नवजात शौच / Newborn Bowel Movements
    अगर नवजात को बार-बार दस्त लग रहें। या फिर 20 से 24 घण्टे तक शौच नहीं आती है। तो तुरन्त चिकित्सक को दिखायें। और हमेशा नवजात शौच के बाद साफ सफाई का विशेष ध्यान दें। नाॅमल गुनगुने पानी से सफाई के बाद साफ कोमल कपड़े से नवजात शरीर सुखाकर एंटीसेप्टिक क्रीम, आॅयल इस्तेमाल करें। नवजात को बार-बार दस्त आने एवं अन्य तरह के लक्षण महसूस होने पर तुरन्त चिकित्सक को दिखायें। नवजात को 24 घण्टे तक शौच नहीं आना, बार-बार शौच, शिशु का देर तक चिल्लाना अस्वस्थ की ओर संकेत करता है। शिशु को तुरन्त बच्चा स्वास्थ्य केन्द्र में दिखायें।
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